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BAED-02
१वान
महाशा
वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा (राज.)
अनुक्रमणिका
शिक्षार्थी अवबोध क्रम.सं. इकाई का नाम
पृष्ठ संख्या शिक्षा मनोविज्ञान-अर्थ, प्रकृति क्षेत्र एवं उपयोगिता
8-23 अभिवृद्धि एवं विकासः अर्थ, विशेषताएँ और प्रभावित करने वाले 24-49 कारकाँ बालक का शारीरिक एवं गामक विकास
50-68 पियाजे के अनुसार बालक का ज्ञानात्मक विकास
69-76 सामाजिक एवं संवेगात्मक विकास प्रक्रिया एवं परिवर्तन
77-105 अधिगम का अर्थ, प्रत्यय, स्वरूप और प्रकार
106-120 अधिगम के सिद्धान्त
121-131 अधिगम अन्तरण
132-147 गने दवारा प्रतिपादित अधिगम-अनुक्रम
148–160 व्यक्तित्व का निर्माण एवं विकास
161-182 व्यक्तित्व के गुण,प्रकार व प्रभावित करने वाले कारक
183-205 वैयक्तिक विभिन्नताएँ : संकल्पना, प्रकृति एवं विशेषताएँ, प्रकार, 206-221 क्षेत्र, कारण, मापन विधियाँ बुद्धि की अवधारणा एवं बुद्धि के सिद्धान्त
222-247 अभिप्रेरणा-संकल्पना तथा अधिगम पर प्रभाव
248-261 विशिष्ट आवश्यकताओं वाले बालक श्रवण व दृष्टि दोषयुक्त बालक, 262-279 प्रतिभाशाली व पिछड़े बालक तथा बाल अपराधी बालक बालकों का निर्देशन एवं परामर्श
280-302 समायोजन
303-313 सृजनात्मकता
314-320

इकाई 1 शिक्षा मनोविज्ञान – अर्थ, प्रकृति क्षेत्र एवं उपयोगिता (Educational Psychology-Meaning, Nature, Nature,
Scope and Utility) इकाई की रूपरेखा 1.0 उद्देश्य 1.1 प्रस्तावना 1.2 शिक्षा का अर्थ 1.3 मनोविज्ञान का अर्थ
1.3.1 आत्मा के विज्ञान के रुप में मनोविज्ञान 1.3.2 मन के विज्ञान के रुप में मनोविज्ञान 1.3.3 चेतना के विज्ञान के रुप में मनोविज्ञान
1.3.4 व्यवहार के विज्ञान के रुप में मनोविज्ञान 1.4 मनोविज्ञान व शिक्षा में सम्बंध 1.5 मनोविज्ञान का शिक्षा पर प्रभाव 1.6 शिक्षा का मनोविज्ञान पर प्रभाव
1.6.1 शिक्षा द्वारा मनोविज्ञान का अध्ययन सम्भव होता है। 1.6.2 शिक्षा द्वारा मनोविज्ञान का ज्ञान सुरक्षित रखा जा सकता है ।
1.6.3 शिक्षा मनोविज्ञान के विषय की विषयवस्तु का विकास करती है । 1.7 शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ एवं परिभाषा 1.8 शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति 1.9 शिक्षा मनोविज्ञान के क्षेत्र 1.10 शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता
1.10.1 शिक्षा आयोजकों के लिए उपयोगी 1.10.2 शैक्षिक प्रबन्धकों व प्रशासकों के लिए उपयोगी 1.10.3 प्रधानाचार्यों के लिए उपयोगिता
1.10.4 शिक्षकों के लिए उपयोगिता 1.11 सारांश 1.12 मूल्यांकन प्रश्न 1.13 सन्दर्भ ग्रन्थ 1.0 उद्देश्य
इस इकाई को पढ़ने के बाद आप –

• शिक्षा, मनोविज्ञान के अर्थ को स्पष्ट कर सकेंगे । • शिक्षा व मनोविज्ञान के अर्थ को स्पष्ट कर सकेंगे । • शिक्षा व मनोविज्ञान पर प्रभाव को स्पष्ट कर सकेंगे । • शिक्षा मनोविज्ञान के अर्थ और परिभाषा की विवेचना कर सकेंगे । • शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति की चर्चा कर सकेंगे ।
शिक्षा मनोविज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों की व्याख्या कर सकेंगे । शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता का वर्णन कर सकेंगे ।
1.1 प्रस्तावना
मानव समाज में सभ्यता एवं संस्कृति के प्रकार एवं हस्तान्तरण के लिए शिक्षा का उल्लेखनीय योगदान हे । शिक्षा के अभाव में मनुष्य भी जीव जगत के अन्य प्राणियों के ही समान हो जाता है अतः शिक्षा के इस अद्वतीय महत्व को ध्यान में रखते हुए इससे सम्बन्धित विभिन्नताओं का अध्ययन करना अनिवार्य हो जाता है | इसी सन्दर्भ में शिक्षा
नोविज्ञान का भी अध्ययन किया जाने लगा है क्योंकि अनेक शिक्षा शास्त्रियों ने शिक्षा तथा मनोविज्ञान के घनिष्ठ एवं पारस्परिक सम्बन्ध को पहचाना है । शिक्षा एवं शिक्षा मनोविज्ञान के विषय में विस्तृत अध्ययन करने के लिए मनोविज्ञान तथा शिक्षा के अर्थ एवं पारस्परिक सम्बन्धों आदि को जानना आवश्यक है । अतः इस इकाई में शिक्षा, मनोविज्ञान का विस्तृत अर्थ स्पष्ट करते हुए वह बताने का प्रयास किया गया है कि शिक्षा मनोविज्ञान किसे कहते है। तथा इसकी प्रकृति, क्षेत्र व उपयोगिता को भी विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है ।। 1.2 शिक्षा का अर्थ
शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की शिक्ष धातु में अ प्रत्यय लगाने से बना है । शिक्ष का अर्थ हैं “सीखना और सिखाना” । अतः शिक्षा शब्द का शाब्दिक अर्थ हुआ सीखने व सिखाने की क्रिया। अंग्रेजी में शिक्षा को एजूकेशन कहते है जिसका अर्थ हैं अन्दर से आगे बढ़ना । अन्दर से आगे बढ़ने का अर्थ है कि प्रत्येक की जन्मजात शक्तियों को उचित वातावरण में सही दिशा की ओर विकसित करना । स्पष्ट है कि शिक्षा और इसके अंग्रेजी शब्द ‘एजूकेशन दोनों ही शब्दों का शाब्दिक अर्थ मनुष्य की आन्तरिक शक्तियों को आगे बढ़ाने वाली विकसित करने वाली प्रक्रिया है, दूसरे शब्दों में शिक्षा का अर्थ मनुष्य की आन्तरिक शक्तियों को आगे बढ़ाने वाली, विकसित करने वाली प्रक्रिया से हे । अतः शिक्षा मनुष्य के विकास का मूल साधन है। क्योंकि इसके द्वारा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का विकास, उसके ज्ञान एवं कला कौशल में वृद्धि तथा व्यवहार में परिवर्तन होता है और उसे एक सभ्य नागरिक बनाया जाता है ।
शिक्षा के स्वरूप एवं कार्यों की व्याख्या विशेष रुप से दार्शनिकों, समाजशास्त्रियों, राजनीति शास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों ने अपने दृष्टि से की है । शिक्षा के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिये उनके दृष्टिकोण को समझना आवश्यक है ।।
दार्शनिकों के अनुसार शिक्षा एक सोद्देश्य प्रक्रिया है । इसके द्वारा मनुष्य के ज्ञान, कौशल, कला में वृद्धि की जाती है, व्यवहार में परिमार्जन किया जाता है । गांधी जी के अनुसार

“शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक और मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा के सर्वांगीण और सर्वोत्तम विकास से है ।” (Gandhi Ji -“By education I mean an all-round drawing out of the best in child and man body mind and spirit”)
समाजशास्त्रियों ने शिक्षा को सामाजिक प्रक्रिया बताया है साथ ही कहा कि यह अविरल प्रक्रिया है, दुविधुव्रीय प्रक्रिया है, गतिशील प्रक्रिया है और विकास की प्रक्रिया हैं ।
राजनीतिज्ञों ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का विकास शिक्षा पर निर्भर करता है इसके द्वारा श्रेष्ठ नागरिकों का निर्माण किया जाता है । प्लेटो की इसी मत को मानते थे ।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मनुष्य का विकास उसकी जन्मजात शक्तियों और पर्यावरण पर निर्भर करता है । अतः शिक्षा द्वारा जन्मजात शक्तियों का विकास करने के पश्चात समाज, राष्ट्र की ओर अग्रसर होना चाहिए ।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर हम कह सकते है कि शिक्षा एक अनवरत चलने वाली सौद्देश्य प्रक्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का विकास उसके ज्ञान, कला, कौशल में वृद्धि तथा व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है । इस प्रकार सुसंस्कृत, सभ्य, एवं श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण किया जाता है । इसके द्वारा व्यक्ति एवं समाज दोनों का विकास होता है ।
1.3 मनोविज्ञान का अर्थ
मनोविज्ञान एक ऐसा विज्ञान है जो प्राणियों के व्यवहार मानसिक तथा दैहिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है । मानसिक और दैहिक प्रक्रियाओं में चिन्तन के साथ-साथ पशु पक्षियों के व्यवहार भी सम्मिलित रहते है । मनोविज्ञान के अर्थ और प्रकृति को समझने के लिये मनोविज्ञान के शाब्दिक अर्थ व मनोविज्ञान की परिभाषा के ऐतिहासिक विकास क्रम को समझना उचित होगा । ‘मनोविज्ञान’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है ‘मन का विज्ञान’ । दूसरे शब्दों में जो मन का अध्ययन करें

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