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राष्ट्रीय शिक्षा के सामान्य स्वरूप के अनुरूप स्तर पर आधारित होना चाहिए । 2. केन्द्र अथवा राज्य सरकारों को मेरिट के आधार पर चुने हुये छात्रों को उनमें प्रवेश दें
तथा प्रति माह छात्रों को छात्रवृतियाँ भी प्रदान करनी चाहिए । 3. विकलांग बच्चों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए अधिक संख्या में स्कूल
स्थापित होने चाहिए । (द) सह- शिक्षा | 1. लड़के एवं लड़कियों को दी जाने वाली शिक्षा में कोई भेद न किया जाए परन्तु समस्त
बालिका विद्यालयों और सहशिक्षा विद्यालयों में प्रत्येक लड़की के लिए गृह विज्ञान के
अध्ययन के लिए विशेष सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए । 2. लड़कियों के लिए राज्य सरकारों को क्षेत्रों की आवश्यकतानुसार यथासम्भव अलग
स्कूल. खोलने चाहिए । 3. सह शिक्षा के स्कूलो में लड़कियों की आवश्यकताओं की पूर्ति और निश्चित संख्या में
अध्यापिकाओं की नियुक्ति के बारे में नियमों का कठोरतापूर्वक पालन किया जाए ।
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15.9.2 भाषाओं का अध्ययन
आयोग के भारत में मुख्यत: तीन भाषाओं के अध्ययन का सुझाव दिया । कियाहिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत तथा भाषा सम्बन्धी अन्य सुझाव दिये(अ) हिन्दी का स्थान | 1. संविधान में हिन्दी को राजभाषा का स्थान दिया गया है । 2. कुछ समय बाद हिन्दी केन्द्र और राज्यों के बीच पारस्परिक आदान-प्रदान की भाषा हो।
जायेगी। 3. हिन्दी अधिकांश लोगों के विचारों के आदान-प्रदान की भाषा बन जायेगी ।
4. राजभाषा के रूप में हिन्दी राष्ट्रीय एकता और सुदृढ़ता का विकास करेगी । (ब) अंग्रेजी का स्थान
1. अंग्रेजी देश के शिक्षित वर्गों में बहुत लोकप्रिय है । 2. अंग्रेजी के अध्ययन ने भारत में राजनैतिक तथा अन्य क्षेत्रों में एकता लाने के लिए
बहुत कार्य किया है । 3. अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में भारत ने जो स्थिति प्राप्त कर रखी है, वह अंग्रेजी के अध्ययन का
फल है । (स) संस्कृत का स्थान
1. संस्कृत अधिकांश भारतीय भाषाओं की जननी है | अत: इसका ज्ञान आवश्यक है | 2. संस्कृत ने सदैव लोगों को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोणों से अपनी ओर आकर्षित
किया है । 3. संस्कृत के अध्ययन से ही भारत के महान ग्रंथों में भरे ज्ञान को प्राप्त किया जा | सकता है । (द) भाषा सम्बन्धी अन्य सुझाव आयोग ने माध्यमिक स्कूलों में भाषाओं के अध्ययन के बारे में निम्न सुझाव दिये है1. माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या प्रादेशिक भाषा होनी चाहिए । 2. अनेक भाषा सम्बन्धी अल्पसंख्यकों के लिए केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड के सुझावों के
अनुसार भाषाओं के अध्ययन के लिए विशेष प्रकार की सुविधाएँ दी जानी चाहिए । 3. मिडिल स्कूलों में कम से कम प्रत्येक छात्र को दो भाषाओं का ज्ञान दिया जाना चाहिए
जिसमें से एक मातृभाषा या प्रादेशिक भाषा अवश्य हो । 4. अंग्रेजी और हिन्दी की शिक्षा प्राथमिक स्तर के बाद दी जानी चाहिए । । आयोग के भाषा सम्बन्धी सुझाव उसके परिपक्व अनुभव का परिचय देते है । उन्होंने हिन्दी के महत्व पर जो विचार दिये वे पूर्ण रूप से उचित है क्योंकि हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है। अंग्रेजी हमें अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर स्थान देगी । लेकिन आयोग ने कहा कि मिडिल और हाई स्कूलों में दो भाषाएँ पढ़नी पड़ेगी और उनके साथ हिन्दी को भी पढ़ना पड़ेगा । इस प्रकार तीन भाषाओं का अध्ययन करना पड़ेगा, जिससे हो सकता है कि छात्र किसी भी भाषा को अच्छी तरह न समझ सके ।।
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15.9.3 माध्यमिक विद्यालयों का पाठ्यक्रम
सर्वप्रथम आयोग ने तात्कालीन पाठ्यक्रम सम्बन्धी प्राप्त आलोचनाओं का विस्तारपूर्वक अध्ययन किया और उसमें निम्नलिखित दोष बताएं
1. पाठ्यक्रम बहुत संकुचित है ।। 2. यह पुस्तकीय ज्ञान पर बहुत अधिक बल देता है । 3. इसके पाठ्य विषय अनावश्यक तथ्यों और महत्वहीन विवरणों से भरे हुए है । 4. पाठ्यक्रम परीक्षाओं से पूर्णत अधिकृत है ।। 5. पाठ्यक्रम में तकनीकी और व्यावसायिक विषयों का अभाव है । 6. इसका निर्माण विशेष रूप से कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए किया जाता है । 7. इसमें छात्रों की रूचियों, आवश्यकताओं और वैयक्तिक विभिन्नताओं पर ध्यान नहीं
दिया जाता। आयोग ने माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम के बारे में सुधार के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए ।
1. पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए जिससे विद्यार्थी की विभिन्न प्रविर्तियो का विकास हो । 2. पाठ्यक्रम में परिवर्तन का होना आवश्यक है जिससे उसमें विद्यार्थियो की
आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सके । 3. पाठ्यक्रम सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए |
4. पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए जिससे विद्यार्थी समय के सदुपयोग को समझे । इन सुझावों के आधार पर आयोग ने मिडिल स्तर के पाठ्यक्रम में निम्नलिखित विषय निर्धारित किये –
1. भाषाये 2. सामाजिक शिक्षा 3. सामान्य ज्ञान 4. गणित 5. कला और संगीत 6. शिल्पकला 7. शारीरिक शिक्षा
आयोग ने कहा कि माध्यमिक विद्यालयों में अनेक प्रकार के पाठ्यक्रमों कि व्यवस्था की जाए तथा पाठ्यक्रमों में ये 7 समूह हो –
1. मानव ज्ञान सम्बन्धी विषय 2. विज्ञान 3. औद्योगिक विषय 4. वाणिज्य विषय 5. कृषि ललित 6. कलाएं 7. गृह विज्ञान
आयोग के अनुसार ली जाने वाली परीक्षा ही उसके उद्देश्यों की परिचायक होती है | शैक्षणिक योग्यता छात्रों द्वारा प्राप्त बहुमुखी क्रियाओं का योग है जो की उन्हें शिक्षा काल में विद्यालय कक्षा, पुस्तकालय प्रयोगशाला, खेल के मैदान एवं अध्यापक तथा छात्रों के आपसी सम्बन्ध से प्राप्त होती है। अतः नि:संदेह यह कहा जा सकता है कि विद्यार्थी का सम्पूर्ण स्कूली जीवन पठन-पाठन बन जाता है तथा उसके भविष्य निर्माण में परम सहायक सिद्ध होता है। । सर्वप्रथम आयोग ने तत्कालीन पाठ्यक्रम के दोषों पर प्रकाश डाला तत्पश्चात उसने पाठ्यक्रम में सुधार के विषय के बारे में अपने सुझाव पेश किये | इसके बाद उसने विभिन्न वर्गों की आवश्यकतानुसार पाठ व विषय निर्धारित किये, परन्तु आज तक आयोग के सुझावों को पूर्ण
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रूप से लागू नहीं किया गया है । माध्यमिक शिक्षा आयोग ने पाठ्यपुस्तकों के चुनाव के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए1. अनुमोदित पाठ्यपुस्तकों की दशा में सुधार के विचार से एक उच्च अधिकार प्राप्त
पाठ्यपुस्तक समिति गठित की जानी चाहिए, जिसमें निम्न सदस्य होंने चाहिए- उच्च न्यायालय का न्यायधीश ।। – प्रदेश की लोक सेवा आयोग का एक सदस्य | – प्रदेश की विश्वविद्यालय का एक उप-कुलपति |
राज्य का एक प्रधानाध्यापक या प्रध्नाध्यापिका – दो प्रख्यात शिक्षा शास्त्री ।
– शिक्षा संचालक | 2. प्रकाशनों की बिक्री से प्राप्त धनराशि से एक कोष तैयार किया जाना चाहिए, जिसे विद्यालय के बच्चों को छात्रवृति देने, पुस्तके प्रदान करने और कुछ अन्य सुविधाएँ देने
के लिए उपयोग किया जा सके । 3. पाठ्य पुस्तक समिति को पुस्तक के प्रारूप, मुद्रण, उद्धरण और कागज के प्रकार के

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