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का उपयोग होता है । – शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक है । 8 शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति
यह एक व्यवृहत मनोविज्ञान है जिसमें मनुष्य की शारीरिक एवं मानसिक शक्तियों एवं व्यवहार का अध्ययन किया जाता है साथ ही व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित कर उचित दिशा
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प्रदान की जाती है । इसके द्वारा स्थापित सिद्धांत व नियम वस्तुनिष्ठ, सार्वभौमिक और प्रामाणिक होते है । उन्हें प्रयोगों द्वारा सत्यापित किया जाता है । इसलिए यह पूर्ण रुप से शुद्ध विज्ञान है । 9 शिक्षा मनोविज्ञान के क्षेत्र
आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञानिकों के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान का फैलाव मुख्यतः निम्न क्षेत्रों की ओर है- वंशानुक्रम
मानव अभिवृद्धि एवं विकास वैयक्तिक विभिन्नता व्यक्तित्व विशिष्ट बालक अधिगम प्रक्रिया मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम निर्माण शिक्षण विधियाँ
निर्देशन एवं परामर्श – मापन एवं मूल्यांकन – शोध क्षेत्र एवं विधियाँ 10 शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता
शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता शिक्षा जगत से जुड़े हुये निम्नलिखित व्यक्तियों को होती है- शिक्षा आयोजकों के लिए उपयोगी
शैक्षिक प्रबन्धकों व प्रशासकों के लिए उपयोगी प्रधानाचार्यों के लिये उपयोगी शिक्षकों के लिए उपयोगी – अभिभावकों के लिए उपयोगी 1.12 मूल्यांकन प्रश्न निबन्धात्मक प्रश्न
1 शिक्षा और मनोविज्ञान में क्या सम्बन्ध है ? समझाइये ।। 2 शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति स्पष्ट कीजिए और उसके क्षेत्र का वर्णन कीजिए ?
3 शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता का वर्णन कीजिए ? लघुउत्तरीय प्रश्न
1 शिक्षा मनोविज्ञान की क्या प्रकृति है ? 2 मनोविज्ञान और शिक्षा के अर्थ बताइये ? 3 शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षक के लिये क्यों उपयोगी है ?
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प्रदान की जाती है । इसके द्वारा स्थापित सिद्धांत व नियम वस्तुनिष्ठ, सार्वभौमिक और प्रामाणिक होते है । उन्हें प्रयोगों द्वारा सत्यापित किया जाता है । इसलिए यह पूर्ण रुप से शुद्ध विज्ञान है । 9 शिक्षा मनोविज्ञान के क्षेत्र
आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञानिकों के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान का फैलाव मुख्यतः निम्न क्षेत्रों की ओर है- वंशानुक्रम
मानव अभिवृद्धि एवं विकास वैयक्तिक विभिन्नता व्यक्तित्व विशिष्ट बालक अधिगम प्रक्रिया मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम निर्माण शिक्षण विधियाँ
निर्देशन एवं परामर्श – मापन एवं मूल्यांकन – शोध क्षेत्र एवं विधियाँ 10 शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता
शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता शिक्षा जगत से जुड़े हुये निम्नलिखित व्यक्तियों को होती है- शिक्षा आयोजकों के लिए उपयोगी
शैक्षिक प्रबन्धकों व प्रशासकों के लिए उपयोगी प्रधानाचार्यों के लिये उपयोगी शिक्षकों के लिए उपयोगी – अभिभावकों के लिए उपयोगी 1.12 मूल्यांकन प्रश्न निबन्धात्मक प्रश्न
1 शिक्षा और मनोविज्ञान में क्या सम्बन्ध है ? समझाइये ।। 2 शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति स्पष्ट कीजिए और उसके क्षेत्र का वर्णन कीजिए ?
3 शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता का वर्णन कीजिए ? लघुउत्तरीय प्रश्न
1 शिक्षा मनोविज्ञान की क्या प्रकृति है ? 2 मनोविज्ञान और शिक्षा के अर्थ बताइये ? 3 शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षक के लिये क्यों उपयोगी है ?
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1.13 सन्दर्भ ग्रन्थ 1 गुप्ता, एस.पी. और गुप्ता अल्का, उच्चतर शिक्षा मनोविज्ञान, शारदा पुस्तक भण्डार,
इलाहाबाद, तृतीय संस्करण: 2007, पृष्ठ सं. 11-2*-+ । 2 लाल, बिहारी रमन, जोशी चन्द्र सुरेश,. शिक्षा मनोविज्ञान एवं मापन, रस्तोगी
पब्लिकेशन्स, मेरठ, प्रथम संस्करण, 2005, पृष्ठ संख्या 11-24 ।। 3 अरोड़ा, रीता, एवं मारवाह सुरेश, शिक्षा मनोविज्ञान एवं सांख्यिकी, शिक्षा प्रकाशन
जयपुर, 2006, पृष्ठ संख्या 1-21 ।। 4 सिन्हा, एस. एच. एवं शर्मा रचना, शिक्षा मनोविज्ञान, एटलाटिंक पब्लिकेशन्स, नई
दिल्ली, 2004, पृष्ठ संख्या 10-33 ।। 5 माथुर, एस. एस. शिक्षा मनोविज्ञान, विनोद पुस्तक मन्दिर, आगरा, 2004, पृष्ठ संख्या
1-44 ।। 6 Mangal S.K. Educational Psychology Prentice hall of India, New
Delhi, 2002, पृष्ठ 11-18 ।।
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2.4
इकाई 2 अभिवृद्धि एवं विकास : अर्थ, विशेषताएँ और प्रभावित करने
वाले कारक (Growth and Development-Meaning, Characteristics
and Factors Effecting) इकाई की रूपरेखा 2.0 उद्देश्य 2.1 प्रस्तावना 2.2 अभिवृद्धि का अर्थ 2.3
अभिवृद्धि एवं विकास में अन्तर
अभिवृद्धि की दशाएं 2.5 विकास का अर्थ 2.6 विकास के सिद्धान्त
विकास को जैव-मनोवैज्ञानिक अवधारणा 2.8 विकास की विशेषताएँ
विकास को प्रभावित करने वाले कारक 2.9.1 वंशानुक्रम का अर्थ एवं परिभाषाएँ
2.9.1.1 वंशानुक्रम-एक प्रक्रिया 2.9.1.2 वंशानुक्रम के नियम
2.9.1.3 वंशानुक्रम का बालक पर प्रभाव 2.9.2 वातावरण का अर्थ
2.9.2.1 बालक पर वातावरण का प्रभाव 2.9.2.2 वंशानुक्रम एवं वातावरण में सम्बंध
2.9.2.3 विकास को प्रभावित करने वाले कारक 2.10 विकास के अध्ययन की पद्धतियाँ 2.11 विकास की अवस्थाएं 2.12 विकास के विभिन्न आयाम 2.13 उपयुक्त अभिवृद्धि एवं विकास के लिए सुझाव 2.14 सारांश 2.15 मूल्यांकन प्रश्न 2.16 सन्दर्भ ग्रन्थ
2.9
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2.0 उद्देश्य
इस इकाई के अध्ययन के पश्चात् आप – अभिवृद्धि एवं विकास के सम्प्रत्यय को समझेंगे ।
अभिवृद्धि एवं विकास में अन्तर कर सकेंगे । • विकास के विभिन्न सिद्धान्तों को समझ सकेंगे । • विकास की विभिन्न विशेषताओं को जान सकेंगे । • विकास को प्रभावित करने वाले वंशानुक्रम एवं वातावरण को समझ सकेंगे । • विकास के अध्ययन की विभिन्न अध्ययन पद्धति को समझ सकेंगे ।
विकास की विभिन्न अवस्थाओं को जान सकेंगे । विकास के विभिन्न आयामों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे ।
2.1 प्रस्तावना
मानव विकास के इतिहास में ज्ञान-विज्ञान की अनेक नई शाखाओं का विकास हुआ है । आज के युग में ज्ञान-विज्ञान के विकसित होने के कारण मानव विकास को लिपिबद्ध कर लिया गया हैं । मनोविज्ञान भी व्यक्ति के गर्भ में आने से लेकर मृत्यु तक के विकास के सम्बंध में अनेक नवीन पहलुओं को प्रस्तुत करता है जिससे नवीन उपलब्धियाँ होती हैं ।
गर्भाधान से लेकर जन्म तक व्यक्ति में अनेक प्रकार के परिवर्तन होते हैं । जन्म के बाद धीरे-धीरे वयस्क होने तक भी उसमें अनेक प्रकार के परिवर्तन होते हैं । जीवन पर्यन्त विकास का यह क्रम चलता रहता हैं ।।
व्यक्ति का जन्म, विकास एवं मृत्यु सदैव ही मानव अध्ययन के लिए जिज्ञासा बने रहें। विकास का अध्ययन मानव व्यवहार की पूर्णता जानने के लिए होने लगा ।।
प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है कि वह सफलता प्राप्त करने के लिए विकास की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करें । इन अवस्थाओं के कारण विकास की विभिन्न अवस्थाओं में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार वह अपनी कार्य प्रणाली को विकसित करने का प्रयास करें । इसी को इंगित करते हुए एल.ई.टेलर ने कहा है- मनुष्य में, जो कुछ वह अभी है, उससे बदलकर कुछ भिन्न हो जाने की जीवन के प्रत्येक क्षण प्रक्रिया चलती रहती है। उसकी समस्त शैली बदल रही है और एक ही समय में शैली एवं परिवर्तन के तथ्य, दोनों को ध्यान में रखना आवश्यक है । किसी विशेष अवस्था में शैली क्या होगी, यह पहली शैली तथा उस व्यक्ति पर उसके वर्तमान वातावरण द्वारा डाले गए प्रभावों पर निर्भर है । साथ ही उसकी अपनी अनुक्रियाओं पर भी निर्भर है, उन बातों के प्रति भी जो पहले हो चुकी है तथा प्रभावों के प्रति भी जो अब उस पर पड़ रहे हैं ।
कोई भी व्यक्ति किसी भी हद तक क्रमिक अवस्थाओं में अपनी जीवन शैली का निर्माण अपनी पसन्द तथा निर्णयों द्वारा करता हैं । एक बार चुनाव होने पर तथा इस चुनाव का प्रमुख विकसित हो रहे ढांचे पर पड़ चुकने के बाद वह कभी भी मिटाया नहीं जा सकता ।

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