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जब व्यक्ति को जाति या आर्थिक सम्पत्रता के स्थान पर ऊँचा पद न देकर कर्म के आधार पर सामाजिक सम्मान प्रदान किया जाता है तो सामाजिक व्यवस्था अच्छी तरह से बनी रहती है । वर्तमान समय में उसी देश की सामाजिक व्यवस्था अच्छी है, जिसमें सभी व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार कार्य कर प्रतिष्ठा प्राप्त करते है । 10. शिक्षा पद्वति में आवश्यकतानुसार परिवर्तन :
शिक्षा द्वारा सामाजिक व्यवस्था को संतुलित रखा जा सकता है। कभी-कभी यह आवश्यक हो जाता है कि शिक्षा प्रणाली में ऐसे परिवर्तन किए जाये जो सामाजिक व्यवस्था को पूरा कर सके ।
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अर्थात् सामाजिक व्यवस्था का निर्माण तथा सुधार शिक्षा के बिना संभव नही है । वर्तमान सामाजिक व्यवस्था के अनुरूप शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन करके, व्यक्तियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करके तथा व्यवहारिक आदर्शों का निर्माण करके सामाजिक ढांचा सुधारा जा सकता है ।
स्वमूल्यांकन प्रश्न ।
1. समकालीन भारतीय समाज की विशेषताएँ बताइये । 2. वर्तमान भारतीय समाज में कमियों का उल्लेख करिये ।
3. भारतीय सामाजिक व्यवस्था के अनिवार्य तत्वों पर प्रकाश डालिये ।। 9.7 भारत में शिक्षा का उभरता हु आ भविष्य ।
भारत में शिक्षा का उभरता हुआ भविष्य अर्थात् आधुनिकीकरण ।’ ‘आधुनिकीकरण’ इस शब्द के विविध आयाम है यह शब्द किसी पद अथवा स्थिर घटना को ही अभिव्यक्त नही करता बल्कि एक पूर्ण प्रक्रिया को अभिव्यक्त करता है । संकीर्ण शब्द में आधुनिकीकरण का आशय है कि एक परिवार तथा समाज अपने प्राचीन मूल्यों को त्यागकर, नवीन एवं पाश्चात्य मूल्यों को अपना ले । जबकि व्यापक अर्थ में आधुनिकीकरण सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, औद्योगिक एवं नैतिक रूप से उन्नत समाज के अनुरूप ढालना है प्रो. गोरे के अनुसार ” आधुनिकीकरण कोई दर्शन या आंदोलन नही है जिसमें स्पष्ट मूल्य व्यवस्था हो । यह तो परिवर्तन की एक प्रक्रिया है जिसमें आधुनिक बनने की संकल्पना निहित है । “
शिक्षा शास्त्री कोनेले के अनुसार परम्परागत समाज के आधुनिक समाज में परिवर्तित होने के निम्नलिखित परिणाम होते है:
1. आर्थिक विकास में वृद्धि के फलस्वरूप वह समाज आत्मनिर्भर हो जाता है । 2. व्यवसाय अधिक विशिष्ट तथा कुशल हो जाते है ।। 3. वस्तु विनिमय का स्थान मुद्रा ले लेती है ।। 4. नगरीकरण की प्रक्रिया में वृद्धि होती है । 5. समानता धीरे-धीरे संस्तरण (Stratification) का स्थान ले लेती है । 6. यातायात तथा संचार की नवीन विधियों द्वारा भौगोलिक दूरियाँ कम हो जाती है । 7. स्वास्थ्य सुधार तथा उचित मेडिकल देखभाल के कारण जीवन की अवधि लम्बी हो।
जाती है । 9.7.1 आधुनिकीकरण की प्रक्रिया की विशेषताएँ
आधुनिकीकरण के प्रत्यय को समझने के लिए इसकी विशेषताओं को समझना आवश्यक है । आधुनिकीकरण प्रक्रिया की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है – 1. आधुनिक समाज में विशेषीकरण एवं श्रम विभाजन का महत्व अधिक होता है । इस
कारण सामाजिक संरचना में भी परिवर्तन आता है ।
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2. व्यक्ति पुराने व्यवहारिक तत्वों को त्यागकर समाजीकरण के अंतर्गत नवीन व्यावहारिक
प्रतिमानो को अपनाता है । इसलिए सामाजिक गत्यात्मकता (Social Mobilization)
भी इस प्रक्रिया की विशेषता 3. आधुनिकीकरण की महत्वपूर्ण विशेषता शिक्षा में तीव्र वृद्धि है । शिक्षा के प्रसार से लोगों । के सोचने-समझने के तरीके में बदलाव आता है ।। 4. आधुनिकीकरण के विकास में औद्योगीकरण तथा नगरीकरण की भूमिका का बहुत
महत्व है । औद्योगिक प्रसार तथा वैज्ञानिक प्रगति से जीवन तथा विचार दोनो में
बदलाव होते है । फलस्वरूप नवीन दर्शन का जन्म होता है । 5. आधुनिकीकरण के फलस्वरूप सामाजिक जटिलता में वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप
सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक तथा आर्थिक सभी क्षेत्रों में विभेदीकरण में वृद्धि होती
है । 6. आधुनिकीकरण की एक विशेषता नवीन सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक आंदोलनों
का प्रादुर्भाव है । हमारे देश में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप व्यक्तिवाद,
समाजवाद, नवीन मूल्यों तथा धर्म निरपेक्षता का विकास हो रहा है । 7. आधुनिकीकरण में सामाजिक संगठन के रूपों व पद स्थितियों की व्यवस्था में परिवर्तन
दिखायी देते है ।। 9.7.2 आधुनिकीकरण की मांग एवं आवश्यकता
आधुनिकीकरण की मांग पूरे विश्व में रहती है, भारत में चारों ओर आधुनिकीकरण का प्रभाव दिखाई देता है । सांस्कृतिक आधुनिकीकरण की दृष्टि से रहन-सहन, रीति-रिवाज, यातायात के साधनो आदि के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन आये है । परम्परागत रूप से वस्त्रों की सिलाई घरों में की जाती थी, किन्तु आधुनिक समय में सभी लोग दर्जी द्वारा सिले वस्त्र पहनते है । प्रौद्योगिकी ने शहरों के साथ गांवों को भी प्रभावित किया है ।
पाश्चात्य शिक्षा एवं आधुनिकीकरण ने व्यक्ति के जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है आज प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिकीकरण की मांग बढ़ती जा रही है । राष्ट्र तथा समाज के प्रत्येक क्षेत्र में हम नवीन दृष्टिकोण से सोचते है | नये विचार, नयी मान्यताएँ, नये रीतिरिवाज, नयी परम्पराएँ, नये मूल्य सभी आधुनिकीकरण के तत्व है । इसलिए आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । 9.7.3 आधुनिकीकरण के लिए शिक्षा की आवश्यकता
भारत में तीव्र आधुनिकीकरण के लिए शिक्षा की मांग को अस्वीकार नही किया जा सकता । इस कार्य के लिए शिक्षा को अपनी व्यवस्था में निम्न बिन्दुओं पर ध्यान देना होगा :
1. अनिवार्य तथा निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करना । 2. सामाजिक शिक्षा की व्यवस्था करना । 3. शिक्षा द्वारा विज्ञान तथा तकनीकी का व्यावहारिक ज्ञान देना । 4. प्रौढ़ शिक्षा की व्यापक व्यवस्था करना ।। 5. नागरिकों में नव-जागृति लाना ।
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6. संकीर्णताओं से व्यक्तियों को ऊपर उठाना । 7. शिक्षा के द्वारा व्यक्तियों में सभी क्षेत्रो में चेतना लाना ।
8. मानवीय मूल्यों एवं मानवतावादी दृष्टिकोण को विकसित करना । 9.7.4 शिक्षा द्वारा भारतीय समाज का आधुनिकीकरण
यदि भारतीय समाज को विश्व के अन्य उत्तर समाज के साथ खड़ा होना है, तो उसे प्राचीन कूपमण्डूकता से बाहर निकलकर विश्व में जो बदलाव हुए है । उनका लाभ लेते हुए तथा साथ ही अपनी गौरवमयी सांस्कृतिक परम्पराओं को बचाते हुए संतुलित सामाजिक विकास तीव्रता से करना होगा । यह कार्य शिक्षा के बिना संभव नहीं है इसलिए शिक्षा का फैलाव तथा स्तर बढ़ाना होगा । हमें शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन लाकर शिक्षा को अधिक उपयोगी तथा विशिष्ट बनाना होगा । शिक्षा में निम्न परिवर्तन आवश्यक है :
1. शिक्षा में अवसरों की समानता तथा शिक्षा के सार्वभौमीकरण पर बल दिया जाए । 2. शिक्षा में भारतीयता के पुट के साथ इसे विकासोन्मुख बनाया जाए । 3. कृषि, तकनीकी, व्यावहारिक तथा व्यावसायिक शिक्षा को अधिक महत्व दिया जाए । 4. बालकों के विकास हेतु औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों प्रकार की शिक्षा दी जाए । 5. शिक्षा को जीवनोपयोगी तथा राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए । 6. पत्राचार शिक्षा तथा खुले विश्व विद्यालय के द्वारा शिक्षा जन-जन तक पहुँचायी जाये। 7. शिक्षा की ऐसी व्यवस्था की जाए जो छात्रों को सामाजिक तथा वैज्ञानिक परिवर्तनों के |

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