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17. बौद्धिक संपदा अधिकार : यदि भारत को वैश्विक ज्ञान-नेता बनना है तो हमें ज्ञान के
सृजन में सबसे आगे रहना होगा । ज्ञान के सृजन को सुविधापूर्ण बनाने के लिये रा.शा.आ. ने पेटेंट कार्यालयों का आधुनिकीकरण करने, वैश्विक मानकों का निर्माण करने, एक विश्वस्तरीय आईपीआर (Intelactul Proparty Right) आधारिक तंत्र हेतु प्रयास किये जाने की सिफारिश की हैं । इसके अलावा रा.जा.आ. ने एक पृथक आई.पी.आर. न्यायाधिकरण, कटिंग ऐज, आई.पी.आर. नीति के लिये राष्ट्रीय संस्थान तथा एक वैश्विक प्रौद्योगिकी अभिग्रहण निधि जैसे नए तंत्रों की स्थापना की सिफारिश
की है । 18. नवाचार : रा.ज्ञा.आ. ने भारतीय आर्थिक उन्नति में नवाचार की भूमिका को एक
महत्वपूर्ण तत्व माना है । सर्वेक्षण से पता चला है कि विशाल कंपनियों, लघु, मझोले उद्यमों में नवाचारों की तीव्रता आई है किन्तु अभी भी कौशल की कमी, शिक्षा पाठ्यचर्या में औद्योगिक नवाचार समस्या, समाधान व प्रयोग पर कार्य बल आदि की बाधाएँ भी हैं । अत: भारत में उच्चतर शिक्षा प्रणाली का व्यवस्थागत सुधार, उद्योगविश्वविद्यालयों संस्थानों के बीच प्रभावी सहयोग, बौद्धिक पूँजी विकसित करने, उद्योग
सरकार-उपभोक्ता के मध्य प्रभावी सहक्रियाएँ उत्पन्न करने की आवश्यकता है । 19. उद्यमशीलता : रा.ज्ञा.आ ने ऐसे तत्वों की तलाश हेतु अध्ययन किया जिन्होंने भारत
में उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया तथा जो उद्यमशीलता को अधिक उन्नत व सुविधापूर्ण बना सकते हैं । तत्पश्चात एकल खिड़की प्रणाली, संयुक्त प्रार्थना पत्र, विशेष वाणिज्यिक न्यायालयों तथा सीमित देयता साझीदारी जैसे नये संस्थागत तंत्रों की स्थापना करने की सिफारिश की है । साथ ही एकल स्टॉफ दुकानों, वेब आधारित पोर्टलों, सूचनापरक पुस्तिकाओं का सृजन, सीड पूँजीगत वित्तपोषण हेतु भी सिफारिशें दी हैं । उद्यमशीलता तत्वों और उद्गम केन्द्रों के सृजन, उद्योग शैक्षणिक अभिसरण विद्यालय व महाविद्यालय पाठ्यक्रमों में भी उद्यमशीलता को शामिल करने की
सिफारिश की गई है ।। 20. परम्परागत चिकित्सा : रा.ज्ञा.आ. की यह सिफारिश है कि परम्परागत चिकित्सा में
उत्तम शिक्षा हेतु प्रयास किये जाने चाहिये । जड़ी बूटी से बनी दवाओं के अन्र्तराष्ट्रीय रूप से स्वीकृत मानकीकरण और विकास, नैदानिक परीक्षणों को बढ़ावा देने, विश्वस्तरीय प्रमाणन प्रक्रिया का अनुपालन, एकजुट उच्चतर निवेशों तथा कठोर प्रविधियों के माध्यम से अनुसंधानों का सुदृढ़ीकरण किये जाने की आवश्यकता हेतु सिफारिशें की हैं । परम्परागत चिकित्सा के वाणिज्यीकरण को प्रोत्साहन, परम्परागत चिकित्सकीय ज्ञान के स्रोतों की बेहतर सुरक्षा हेतु आईपीआर तंत्र का निर्माण किये जाने
की भी सिफारिश की गई है । 21. कृषि : राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने कृषि अनुसंधान संस्थानों का आधुनिकीकरण करने, उन्हें
नवाचारों के लिए प्रेरित करने, अनुसंधान हेतु समन्वय व सहयोग को और अधिक लचीला बनाने, उपेक्षित क्षेत्रों में अनुसंधानों को बढ़ावा देने, कृषि विश्वविद्यालयों की
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पाठ्यचर्या में सुधार करने हेतु सिफारिशें प्रस्तुत की हैं । रा.ज्ञा.आ ने कृषि प्रौद्योगिकी प्रबन्ध एजेन्सी की पुर्नरचना की भी सिफारिश की है जिससे कि इसे विकेन्द्रीकृत,
सहभागितापूर्ण तथा स्थानीय रूप से और अधिक संवेदी बनाया जा सके ।। 22. जीवन स्तर में सुधार लाना : राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने ज्ञान अनुप्रयोगों को विशेष रूप
से ग्रामीण क्षेत्रों में आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार लाने के प्रति केन्द्रित किया है । इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु समूचे देश के भीतर पंचायती ज्ञान केन्द्र स्थापित किये जाने की सिफारिश की है जो कि ज्ञान आयोग का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चत करेंगे स्थानीय समाधान तैयार करेंगे, विभिन्न सामाजिक क्षेत्र कार्यक्रमों के अभिसरण के लिये एक मंच उपलब्ध करायेंगे | रा.ज्ञा.आ. ने श्रम की गरिमा बढ़ाने तथा कुशलतापूर्ण रोजगार, संवर्धित उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिये टूल डिजाइन में नए परिप्रेक्ष्यों
की अवधारणा विकसित करने की भी सिफारिश की ।। 23. ई-अभिशासन : एक सच्चे ज्ञानवान समाज का सृजन करने के लिये लोकतांत्रिक सरकार
के विकास हेतु नागरिकों के लिये प्रभावी ज्ञान सेवाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण है । रा.जा.आ. का मानना है कि ई-अभिशासन से तात्पर्य केवल चिरपुरातन प्रक्रियाओं के कम्प्यूटरीकरण से नहीं है बल्कि हमारी प्रणालियों को अधिक कुशल व नागरिक अनुकूल बनाने की दिशा में पुनर्विचार से है । आयोग ने सरकारी प्रक्रियाओं की पुनर्रचना, बुनियादी ढांचे की सरलता, पारदर्शिता, उत्पादकता व कुशलता में वृद्धि हेतु ईअभिशासन को सामान्य मानक तैयार करने व एक आधारिक तत्र तैयार करने सम्बन्धी सिफारिश प्रस्तुत की है ।
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स्वमूल्यांकन प्रश्न
भाषा का महत्व क्यों है? शिक्षा के माध्यम के रूप में भाषा का क्या स्वरूप होनी चाहिए? ज्ञान के नेटवर्क और पोर्टल की आवश्यकता बताइये? विद्यालय शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के बारे में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने क्या सिफारिशें दी हैं? व्यवसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण तथा मुकत्व एवं दूरस्थ शिक्षा में अंतर स्पष्ट
कीजिए? 18.2.4 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशों पर अनुवर्ती कार्यवाही
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की परिकल्पना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता 11वीं पंचवर्षीय योजना में परिलक्षित होती है | 11वीं पंचवर्षीय योजना में त्वरित व समान उन्नति प्राप्त करने के लिये शिक्षा को एक केन्द्रीय साधन के रूप में सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है ।। (1) 11वीं पंचवर्षीय योजना में 3 ट्रिलियन रु. आवंटन का प्रस्ताव रखा गया है । जो
10वीं पंचवर्षीय योजना से चार गुना ज्यादा है । इस प्रकार कुल योजना में शिक्षा का हिस्सा 7.7 से बढ़कर 20 प्रतिशत हो जायेगा ।
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(2) माध्यमिक स्तर पर सर्वसुलभता व गुणवत्ता की योजना के तहत 6000 नये उच्च
स्तरीय मॉडल स्कूल खोले जायेंगे, प्रत्येक ब्लॉक में इस तरह का कम से कम एक
स्कूल अवश्य होगा । (3) पहली धारा में सरकार द्वारा वित्त पोषित 2500 स्कूल खोले जायेंगे | 2000 केन्द्रीय । विद्यालय 500 नवोदय विद्यालय शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े ऐसे क्षेत्रों में खोले जाएंगे
जहाँ अनु. जाति, जनजाति व पिछड़े वर्गों की आबादी की बहुलता है । (4) दूसरी धारा में लगभग 250 स्कूल सरकारी व निजी भागीदारी के माध्यम से अन्य
ब्लाकों में खोले जायेंगे, जिनमें भौगोलिक, जनसांख्यिकीय, बालक-बालिका और
सामाजिक समानता पर बल दिया जायेगा । (5) 11 वीं पंचवर्षीय योजना में 30 नये विश्वविद्यालय, 8 नए आईआईटी, 7 नये
आईआईएम., 5 नए भारतीय विज्ञान संस्थान, 2 नियोजन और वास्तुकला स्कूल, 10
एनआईटी, 373 नए डिग्री कॉलेज, 1000 नये पोलीटेक्निक भी खोले जायेंगे । (6) यूजीसी, एआईसीटी, एमसीआई, एनसीटीई, वीसीआई जैसे विनियामक संस्थानों की
पुनरीक्षा की जानी चाहिए साथ ही अनुसंधान में नवीनीकरण के लिये एक राष्ट्रीय
विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड का प्रस्ताव किया गया है । (7) एक राष्ट्रीय अनुवाद मिशन स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है तथा इसके लिये

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