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सुझाव दिये ।। 11. शिक्षकों की स्थिति, सेवा-दशा एवं शिक्षण-प्रशिक्षण के सम्बन्ध में भी आयोग ने
महत्वपूर्ण सिफारिशें की । 12. आयोग ने माध्यमिक शिक्षा की परीक्षा प्रणाली में सुधार हेतु व्यापक सुझाव देकर
परीक्षा प्रणाली को दोषमुक्त बनाने का प्रयास किया । 15.11 सारांश
स्वतंत्र भारत के शिक्षा के इतिहास में माध्यमिक शिक्षा आयोग का एक महत्वपूर्ण स्थान है । इसने देश के नवयुवकों को दी जाने वाली शिक्षा को व्यक्तियों एवं समाज की आवश्यकताओं और राष्ट्र की बढ़ती हुई मांगों को पूरा करना के बारे में अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये । आयोग ने माध्यमिक शिक्षा के पुर्नसंगठन में होने वाली व्यय की पूर्ति के लिए आय के अनेक साधन बताये । माध्यमिक शिक्षा का उत्तरदायित्व केन्द्र सरकार पर भी डाला । आयोग के कुछ महत्वपूर्ण सुझाव – वैयक्तिगत योग्यताओं के अनुसार विषयों का चुनाव, बहुउद्देशीय विद्यालयों की स्थापना, उद्योगो की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कृषि शिक्षा, भावी व्यवसाय को चुनने के लिए छात्रों को मार्गदर्शन व परामर्श, शैक्षिक योग्यताओं का मूल्यांकन करने के लिए नवीन शिक्षा पद्धति एवं पाठ्यक्रम का विभिन्नीकरण है ।। 15.12 मूल्यांकन प्रश्न
1. माध्यमिक शिक्षा आयोग के अनुसार माध्यमिक शिक्षा के क्या उद्देश्य है ? 2. माध्यमिक शिक्षा आयोग ने विद्यमान शिक्षा प्रणाली में किन- किन दोषों को बताया,
लिखिए? 3. माध्यमिक शिक्षा आयोग ने शिक्षा के किस क्षेत्र पर अधिक बल दिया ? 4. माध्यमिक शिक्षा की अवधि और भाषा शिक्षण के विषय में माध्यमिक शिक्षा आयोग
के क्या सुझाव है? 5. माध्यमिक शिक्षा के नवीन संगठन के विषय में मुदालियर आयोग की सिफारिशों का
संक्षेप में वर्णन कीजिए?
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6. माध्यमिक शिक्षा में गतिशील शिक्षण पद्धतियाँ और छात्रों का भौतिक कल्याण के विषय
में माध्यमिक शिक्षा आयोग के क्या सुझाव है ? 7. माध्यमिक विद्यालयों में मार्गदर्शन-निर्देशन और परीक्षा-मूल्यांकन के विषय में
माध्यमिक शिक्षा आयोग के क्या सुझाव है? 8. माध्यमिक शिक्षा आयोग द्वारा दिये गये वे सुझाव बताइये जिनका अध्यापक प्रशिक्षण
की गुणवता पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है ? 9. वित और प्रशासनिक समस्याओं के विषय में माध्यमिक शिक्षा आयोग के क्या सुझाव
है ? 10. टिप्पणी कीजिए
1. चरित्र निर्माण की शिक्षा 2. विद्यालय में पुस्तकालय का स्थान 3. माध्यमिक विद्यालय में पाठ्यक्रम
15.13 संदर्भ ग्रंथ 1. Agarwal, J.C (1966) Major Recommendations of the Education
Commission, New Delhi 2. Naik, J.P. (1971) Education commission and after, Macmillam
Calcutta 3. NCERT (2001) Experience in School Education NCERT New Dehli 4. NCERT (2005) National Curriculume Fromwork-NCERT, New Dehli 5. Nurullah and Naik (1973) student history of Education In India,
Macmillan, Calcutta, Vth Edition. 6. Report of the Secondary Education commission 1952-53, Ministry
of Education. Govt. of India, New Dehli.

इकाई 16 कोठारी कमीशन (1964-66)
(Kothari Cammission) इकाई की रुपरेखा 16.0 उद्देश्य 16.1 प्रस्तावना 16.2 नियुक्ति एवं संगठन 16.3 आयोग का प्रतिवेदन
16.3.1 शिक्षा एवं राष्ट्रीय लक्ष्य 16.3.2 शिक्षा की प्रणाली, संरचना व स्तर 16.3.4 शिक्षक की स्थिति 16.3.5 अध्यापक शिक्षा 16.3.6 नामांकन व मानव शक्ति 16.3.7 शैक्षिक अवसरों की समानता 16.3.8 विद्यालय शिक्षा प्रसार की समस्याएं 16.3.9 विदयालयी पाठ्यक्रम 16.3.10 शिक्षण विधियां, निर्देशन एवं मूल्यांकन 16.3.11 विद्यालय शिक्षा प्रशासन एवं निरीक्षण 16.3.12 उच्च शिक्षा : लक्ष्य एवं सुधार 16.3.13 उच्च शिक्षा : नामांकन एवं कार्यक्रम 16.3.14 विश्वविद्यालयों का अभिशासन 16.3.15 कृषि की शिक्षा 16.3.15 व्यावसायिक, प्राविधान एवं इंजीनियरिंग की शिक्षा 16.3.16 विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान 16.3.17 व्यस्क शिक्षा 16.3.18 शिक्षा का नियोजन एवं प्रशासन
16.3.19 शिक्षा वित्तीय व्यवस्था 16.4 आयोग का मूल्यांकन 16.5 सारांश 16.6 मूल्यांकन प्रश्न 16.7 सन्दर्भ ग्रंथ
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16.0 उद्देश्य
इस इकाई के अध्ययन के बाद आपकोठारी आयोग के गठन व नियुक्ति के बारे में विस्तार से अध्ययन कर सकेंगे | कोठारी शिक्षा आयोग द्वारा शैक्षिक उन्नयन एवं सुधार के संबंध में दिये गये सुझावो
के सम्बन्ध में दिये गये सुझाव को जान सकेंगे । • कोठारी शिक्षा आयोग के सुझावों की समीक्षा कर सकेंगे । • वर्तमान शिक्षा प्रणाली को कोठारी शिक्षा आयोग के सुझावों के परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकित
कर सकेंगे । 16.1 प्रस्तावना
भारत में शिक्षा प्रणाली में सुधार करने हेतु एवं बेहतर शैक्षिक व्यवस्थाओं के लिये सुझाव देने हेतु स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व एवं पश्चात् अनेक आयोग एवं समितियां गठित की गयी
ब्रिटिश शासन काल के दौरान हन्टर कमीशन (1882), भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (1902) तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग (सेडलर आयोग) (1917 ) ने प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च स्तर की शिक्षा में सुधार के लिये अनेक सुझाव दिये । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद डॉ0 राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (1948 ) ने विश्वविद्यालय शिक्षा में सुधार के संबंध में तथा डॉ0 मुदालियर की अध्यक्षता में माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952 ) माध्यमिक शिक्षा में सुधार के लिये अनेक उपयोगी सुझाव दिये । परन्तु विश्व के अन्य देशों की तुलना में शैक्षिक क्षेत्र में पिछड़ेपन को देखते हुये शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिये तथा देश में शिक्षा का एक निश्चित प्रारूप विकसित करने के लिए एक और आयोग गठित करने की आवश्यकता अनुभव की गई । 16.2 कोठारी शिक्षा आयोग की नियुक्ति एवं संगठन
तत्कालीन केन्द्र सरकार ने 14 जुलाई, 1964 को पारित प्रस्ताव के अनुसार प्रो0 डी.एस. कोठारी (अध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के गठन की घोषणा की । आयोग के सचिव श्री जे.पी. नायक (अध्यक्ष, शिक्षा नियोजन, गोखले इन्स्टीट्यूट, पूना) तथा सह सचिव श्री जे.एफ मैकडूगल (संचालक, डिपार्टमेन्स ऑफ स्कूल एण्ड हायर एजूकेशन, यूनेस्को, पेरिस) थे । आयोग के सदस्यों में देश विदेश के प्रोफेसर एवं शिक्षाशास्त्री शामिल थे ।
2 अक्टूबर, 1964 को नई दिल्ली में विज्ञान भवन में आयोग के उद्घाटन के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति ने कहा था – “मेरी यह हार्दिक इच्छा है कि आयोग शिक्षा के सभी पहलुओं -प्राथमिक, माध्यमिक, विश्वविद्यालय एवं तकनीकी की जाँच करें एवं ऐसे सुझाव दे जिससे हमारी शिक्षा व्यवस्था को अपने सभी स्तरों पर उन्नति करने में सहायता मिले । “
। आयोग ने अपना कार्य सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से करने के लिये 12 कार्यदल (Task force) तथा 7 कार्य समितियाँ (Working group) गठित की । स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, कृषि शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान, अध्यापक
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प्रशिक्षण एवं स्थिति तथा छात्र कल्याण । शिक्षण विधियों, जनशक्ति तथा शैक्षिक प्रशासन एवं वित्त व्यवस्था से संबंधित कार्यदल बनाये गये और स्त्री शिक्षा, पिछड़े वर्गों की शिक्षा, पूर्व प्राथमिक शिक्षा, पाठ्यक्रम विकास आदि विषयों से संबंधित कार्यसमितियों गठित की गई । इन कार्यदलों और समितियों ने विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करके, विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों एवं शिक्षा में रूचि रखने वाले व्यक्तियों से बातचीत करके, सेमीनार व सम्मेलनों का आयोजन करके तथा अनेक माध्यमों से उक्त विषयों पर सूचनाएं प्राप्त कर 29 जन, 1966 को अपना प्रतिवेदन तैयार कर तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्री एम. सी. चागला को प्रस्तुत किया ।
16.3 आयोग का प्रतिवेदन

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